सामाजिक कार्यकर्ता बिंदु देवी की गिरफ्तारी पर एन.ए.पी.एम. आंदोलित

पटना : बिहार की प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और सरपंच बिंदु देवी की गिरफ्तारी  पुलिस उत्पीड़न की कार्रवाई पर एन.ए.पी.एम. ने गहरा आक्रोश जताया है। एन.ए.पी.एम. का आरोप है कि संगठन की वरिष्ठ कार्यकर्ता बिंदु देवी को रात के अंधेरे में पुलिस थाने पर ले आयी और फर्जी मुकदमा कर जेल भेज दिया। इस मामले की संगठन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर जांच की मांग की है।

सारण छपरा जिले के परसा प्रखण्ड के सगुनी पंचायत की सरपंच बिंदु देवी एक प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता हैं,  जो जनसंगठनों के राष्ट्रीय मंच,  एन.ए.पी.एम. से जुड़ी हैं। जिन्हें परसा थाने की पुलिस  ने 24 अक्टूबर की देर शाम गिरफ्तार कर  लिया और बाद में फर्जी मुकदमा दर्ज करते हुए जेल भेज दिया, जबकि इस मामले में ग्रामीणों का कहना है कि बिंदु के दो पट्टीदारों के बीच उसी दिन आपसी विवाद हुआ था। बिंदु ने बीच -बचाव करते हुए झगड़े को समाप्त कराया। इस पर पंचायत चुनाव में बिंदु की भागीदारी से वंचित करने के लिए एक पक्ष ने उन्हें मुकदमे में फंसाने की साजिश रची। इसकी जानकारी मिलने के बाद सरपंच बिंदु ने तत्काल थाना प्रभारी को पूरे प्रकरण से लिखित रूप से जानकारी दी।

सरपंच बिंदु ने कहा कि शाम में अंधेरा होने पर थाने की पुलिस आयी उसने दोनों पक्षों को पकड़ने के बजाय, बिना किसी से पूछताछ किए उनसे दुर्व्यवहार करने लगी। उन्होंने जब इसका प्रतिरोध किया तो उनको जबरदस्ती जीप में बैठाया गया। बिंदु ने बिना किसी वारंट के रात के अँधेरे में एक महिला सरपंच के साथ गैरकानूनी तरीके से थाने ले जाने की घटना पर प्रतिवाद किया और उनके पति ने पुलिस अधीक्षक सारण सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों को सूचित किया तो पहले थानाध्यक्ष ने कहा कि उनको छोड़ रहे हैं, लेकिन अपने को फंसता देख,  बिंदु की गिरफ्तारी के घंटों बाद गैरकानूनी और  महिला विरोधी  कार्रवाई पर पर्दा डालने के लिए बिंदु और उनके पति मणिलाल का नाम भी प्राथमिकी में डाल दिया। इतना ही नहीं, मामले में पूरे परिवार के सभी सदस्यों पर जिसमें अधिकांश लोग दिल्ली रहते हैं उनका नाम भी प्राथमिकी में फर्जी तरीके से शामिल कर दिया  गया है। घटना के बाद एनएपीएम के राष्ट्रीय समन्वयक महेन्द्र यादव ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजा है जिसमें कहा है कि

 

बिंदु देवी बिहार में उन महिला चुनिन्दा महिलाओं में एक  हैं जो आदर्श ग्राम कचहरी की अवधारणा को धरातल पर  उतारने में पारदर्शिता और जबावदेही तरीके से आदर्श स्थापित कर रही हैं। पटना विश्विद्यालय से अर्थशास्त्र और ग्रामीण विकास विषय में स्नातकोतर की पढ़ाई करने के बाद गांवों में लोगों की सेवा करने के लिए बिना लाभ वाला जैसे सरपंच पद पर कार्य करना शुरू किया। साथ ही राज्य के महिला आंदोलनों में और अन्य सामाजिक कार्य में उनकी भगीदारी महत्वपूर्ण रही है। श्री यादव ने कहा कि न्याय के साथ विकास और महिला सशक्तिकरण के नारे की बिंदु सशक्त उदाहरण बन गयी हैं। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें पुरस्कार मिलना चाहिए, परन्तु दुर्भाग्य है कि उनके खिलाफ फर्जी मुकदमें दर्ज कर पुलिस जेल भेज रही है। उनके पति मणिलाल समाजिक कार्यकर्ता और एनएपीएम के वरिष्ठ साथी हैं। अनेक आंदोलनों से जुड़े है वे पटना उच्च न्यायालय के ऐसे अधिवक्ता है जो गरीब गुरुबा के केस बिना फीस के भी लड़ते रहे हैं।

एनएपीएम ने छपरा पुलिस की मनमानी और गैर कानूनी कार्रवाई से राज्य के पुलिस के माथे पर कलंक लगा है। यह अच्छे कार्य करने वाले लोगों के दिल में डर फैलाने वाली घटना है, इसकी जितनी भी निंदा की जाए कम है। श्री यादव ने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए  कहा है कि बिंदु देवी सरपंच पर फर्जी तरीके से किए गये मुकदमें की समीक्षा करते हुए तत्काल  रिहा करने,  उनके साथ दुर्व्यवहार करने वाली पुलिसकर्मी रूपम कुमारी और थाना प्रभारी अमरेन्द्र कुमार को तत्काल निलम्बित करने,  पुलिस अधीक्षक सारण को जब सभी सूचना मिली उसके बाद बिंदु देवी को छोड़ने के बजाए उनके ऊपर मुकदमा दर्ज कराया गया यह उनके पद के प्रतिकुल आचरण है इसलिए इस मामले की जाँच कराकर वरीय पुलिस पदाधिकारियों पर कारवाई की जाए।

 

 

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