अधिकारियों के मनमाने आदेश पर नियोजित शिक्षकों ने जताया रोष

पटना : बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से जारी किये जा रहे अजीबोगरीब आदेशों से शिक्षक हैरान और परेशान हैं। बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रमंडलीय सह संयोजक आलोक आजाद  ने विडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से शिक्षकों से बैठक करने के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय तकनीक का है। खबरें पूरे विश्व में एक सेकेंड के अन्दर पहुंचती हैं। उस समय शिक्षा विभाग के अधिकारी जो आदेश पारित करते हैं उसे हर कोई देख और पढ़ रहा है। जिससे जनता में भी शिक्षा विभाग की एक गलत तस्वीर जा रही है। लोग इस बात चकित होते हैं और शिक्षकों से पूछते हैं कि क्या अधिकारी भी ऐसे आदेश दे सकते हैं। उस समय शिक्षक भी सोचने पर विवश हो जाते हैं। सह संयोजक ने कहा कि कोरोना संकट में सभी शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों को विद्यालयों में प्रतिदिन उपस्थिति होने का आदेश जारी किया है। जो समझ से परे है। जब राज्य सरकार अपने कार्यालयों में तैंतीस प्रतिशत कर्मचारियों और अधिकारियों को उपस्थित होने का आदेश जारी कर रही है, उस समय शिक्षा विभाग जहां देश और समाज का निर्माण करने वाले होते हैं इस प्रकार का आदेश जारी कर रहे हैं। आदेश यह संदेह पैदा कर रहा है कि अधिकारी शिक्षकों से किसी दुश्मनी का बदला निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक भी स्कूल जाना चाह रहे हैं, लेकिन हर शिक्षक और शिक्षिका के पास अपना निजी वाहन नहीं है। पूरा प्रदेश 31 मई तक बंद है। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बंद है। फिर कैसे शिक्षक स्कूल जायें यह समझ में नहीं आ रहा है। उस पर अधिकारियों का आदेश जारी करना संदेह पैदा करता है। गरमी की छुट्टी को लेकर स्कूल बंद है। इसके बाद भी स्कूल में शिक्षकों को बुलाया जा रहा है। यह शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के प्रति नकारात्मक रवैया दर्शाता है।

श्री आलोक ने सवाल उठाते हुए सरकार से पूछा है कि क्या शिक्षकों को कोरोना वायरस से खतरा नहीं है। वह भी तब जब बिहार के सभी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों तक को कार्यालय में प्रतिदिन नहीं आने का विकल्प दिया जा रहा है। कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी के खिलाफ जारी संघर्ष में बिहार के शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्ष प्रदेश सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। कोरोना वारियर्स बन शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्ष बिना वेतन के भूखे प्यासे अपनी जान की परवाह किये वगैर बिना पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (पीपीई) किट, सेनेटाइजर और अन्य प्रमुख सामग्रियों के साथ बिना इंश्योरेंस, बिना किसी आर्थिक सहयोग के दिन रात प्रवासियों की सेवा दे रहे हैं। कोरोना सेंटर, आइसोलेशन सेंटर, रिसिविंग सेंटर, चौक चौराहों, कंट्रोल रूम, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड  और विभिन्न बसों के साथ आने जाने, कई सरकारी कार्यालयों और गरीबों को खाद्यान्न उपलब्ध करवाने में लगे हुए हैं। ड्यूटी पर लगे शिक्षकों को 350 रूपये प्रति दिन के सरकारी आदेश के बाद भी अभी तक इस राशि का भुगतान शिक्षकों को नहीं मिला है।

उन्होंने कहा की शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने निर्देश जारी किया है कि सभी शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्ष विद्यालय में बने रहेंगे। यह न केवल सोशल डिस्टेंसिंग के खिलाफ है बल्कि मानवता और महामारी के रोकथाम में बाधक भी है। सह संयोजक ने सरकार से पूछा है कि इस तरह के पत्र निकलने के बाद सभी शिक्षक अपने-अपने विद्यालय पहुंचने लगेंगे तो क्या स्थिति होगी और इसका जवाबदेह कौन होगा। सरकार के इस बात पर बैठक में उपस्थित शिक्षकों ने भी विरोध करते हुए रोष व्यक्त किया।

Leave a comment