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कोशी नव निर्माण मंच ने कोशी के प्रवासी श्रमिकों की स्थिति सुधारने के लिए उठायी आवाज

पटना :  बिहार की अर्थव्यवस्था में प्रवासी मजदूरों का अहम योगदान है, रोजगार के अभाव में उन्हें अमानवीय स्थिति में दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है। यह बात कोशी नव निर्माण मंच की ओर से सहरसा के  शंकर चौक स्थित आयोजित कोशी के प्रवासी मजदूरों की स्थिति, योजनाएं और अधिकार विषय पर आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं  ने कही। वक्ताओं ने कहा कि श्रमिको को  हर जगह अपमान झेलना पड़ता है रास्ते में उनके साथ शुरू हुआ अन्याय कार्यस्थल तक जारी रहता है। इतना ही नही संगठित नही होने के कारण नीतिगत अन्याय के शिकार भी श्रमिक होते है ऐसे में संगठित होकर आवाज उठाना ही एक मात्र रास्ता है।

कार्यशाला में उपस्थित प्रवासी मजदूरों ने कोरोना से लेकर अभी तक होने वाली स्थिति की  विस्तार से जानकारी दी। उन लोगों ने कहा कि ट्रेनें कम है टिकट नही मिलता। अशिक्षित होने के कारण जुर्माना पर जुर्माना देना पड़ता है। खड़े खड़े बीमार हो जाते है। पुलिस वालों से लेकर ताली बजाने वाले तक उनसे  ही वसूली करते है। ट्रेन से उतरते  ही काम  नही मिलता। काम मिल गया तो पूरी मजदूरी नही मिलती। यदि किसी को दुर्घटना में मृत्यु हो गयी तब राज्य सरकार की ओर से शुरू की गयी बिहार राज्य  प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना में कागजों की पेचिदगियों के बीच मात्र एक लाख के मुआवजे का प्रावधान है, जबकि राज्य में  आपदा या सड़क दुर्घटना में लोगों को चार लाख मिलता है।

गया में अप्रवासी मजदूरों के लिए पायलट सेंटर चला रहे शत्रुघ्न दास ने सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।  मुख्य अतिथि राष्टीय हमाल पंचायत और अन्य असंगठित कामगार यूनियन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष तथा भारतीय सामुदायिक कार्यकर्ता मंच के समन्वयक अरविंद मूर्ति ने श्रम कोड की जानकारी सहित राष्ट्रीय और राज्य की स्थिति से अवगत कराया।  श्री मूर्ति ने इस कार्यशाला को प्रवासी मजदूरों के हक की लडा़ई शुभारम्भ बताया। कोशी नव निर्माण मंच  के परिषद अध्यक्ष संदीप यादव, सुपौल के जिला अध्यक्ष इंद्र नारायण सिंह, इकबाल भुट्टो, शाहिद परवेज, बिजेन्द्र भारती, अजय कुमार ने भी अपनी बातें रखीं।

कार्यशाला में कई प्रस्ताव पारित किये गये। जिसमें  सरकार की ओर से प्रवासी मजदूरों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने, जिससे सम्मान के साथ श्रमिक बाहर आ – जा सकें। प्रवासी मजदूर दुर्घटना अनुदान योजना की राशि  को बढ़ाते हुए सड़क दुर्घटना की राशि चार लाख  की जाए। उसकी प्रक्रियायों को सरल किया जाए। अगर किसी श्रमिक की मृत्यु होने पर उसका शव उनके घर तक सरकारी खर्च पर लाने की व्यवस्था हो। सरकार प्रवासी मजदूरों के लिए प्रवासी मजदूर बोर्ड बनाए जिसमें श्रमिकों के प्रतिनिधि शामिल किये जायें।  साथ ही हर शहरों का अध्ययन कर जहां – जहां भी मजदूर जाते है वहाँ उन राज्यों और शहरों में नोडल  पदाधिकारी की नियुक्ति की जाये।  जिससे श्रमिक संकट की घड़ी में उनसे सहायता प्राप्त कर सकें। बिहार में भवन निर्माण श्रमिको के  बन्द हित लाभ योजनाओं को तुरन्त प्रभाव से चालू करे और पंजीकरण को सर्व सुलभ बनाए। सभी प्रवासी मजदूरों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ सहित अन्य कल्यणकारी योजनाओं का लाभ दिया जाए।

कार्यशाला  के समापन पर उपस्थित  लोगों ने प्रवासी मजदूरों को संगठित करने का संकल्प लिया। इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए सर्व सम्मति से दुनिदत, सुनील ऋषिदेव, सन्तोष मुखिया, अनिल यादव, श्रवण, राजेन्द्र, अखिलेश, लाल बहादुर शर्मा, रामेश्वर सदा, शिशुपाल, नीतीश, रामचन्द्र शर्मा, शिव शंकर मण्डल, रंजीत यादव, गणेश राम की एक समन्वय समिति बनायी गयी। इसके लिए प्रवासी मजदूर चर्चा अभियान की शुरुआत भी की गयी। कार्यशाला का संचालन महेन्द्र यादव ने किया, जबकि व्यवस्था में धर्मेन्द्र, सतीश, प्रमोद, सिकन्दर समेत अन्य लोग रहे।

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