खेती में बदलाव और कृषि आधारित स्वकच्छप ऊर्जा के लिए प्राकृतिक खेती और प्रौद्योगिकी जरूरी

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीरो बजट पर आधारित प्राकृतिक खेती समेत कृषि और खाद्य प्रसंस्करण के विभिन्न मामलों पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने  वीडियो कान्‍फ्रेंस के माध्‍यम से गुजरात के आणंद में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को सम्‍बोधित करते हुए यह बात कही। प्रधानमंत्री ने कहा कि जीरो बजट आधारित प्राकृतिक खेती और कृषि तथा कृषि आधारित स्वच्छ ऊर्जा को बदलने में प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। श्री मोदी ने कहा कि प्राकृतिक खेती के इस आंदोलन में देश के आठ करोड़ से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के नतीजों से देश भर के किसानों को लाभ पहुंचेगा।
प्रधानमंत्री ने देश के किसानों से बडे पैमाने पर जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाने के लिए हर राज्य और राज्य सरकारों को आगे आना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर एक पंचायत के कम से कम एक गांव को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्राकृतिक खेती दो एकड से कम भूमि वाले 80 प्रतिशत छोटे किसानों के लिए काफी लाभदायक है। श्री मोदी ने कहा कि किसान रसायन और उर्वरक पर अधिक पैसा खर्च कर रहे हैं जबकि प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों की स्थिति में सुधार आएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि य‍ह किसानों के बीच यह मिथक है कि खाद और रसायन के बिना अच्छी फसल संभव नहीं है, लेकिन यह वास्तविकता नहीं है। उन्होंने कहा कि कृषि के अपशिष्ट को जलाने से भूमि की उत्पादकता कम हो रही है।

सम्‍मेलन में उपस्थित गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि केन्द्र सरकार किसानों के कल्याण के लिए काम कर रही है। किसी भी परिस्थिति में केन्द सरकार उत्पादकता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री शाह ने कहा कि सरकार ने कृषि क्षमता को बढ़ाने और किसानों की आय को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये हैं।
तीन दिवसीय इस सम्‍मेलन में 5 हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया है और हजारों अन्‍य किसान वर्चुअल माध्‍यम से इस सम्‍मेलन से जुडे हैं।

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