पटना : बिहार में 18 सितम्बर का दिन ऐतिहासिक रहा, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बारह रेल परियोजना समेत कोसी रेल महासेतु को राष्ट्र को समर्पित किया। इसके साथ ही महात्मा बुद्ध की कर्मस्थली, जैनियों के 24वें तीर्थंकर महावीर की जन्म स्थल और नृत्यांगना आम्रपाली की धरती वैशाली से रेल सेवा शुरू हो गयी। प्रधानमंत्री ने योजनाओं का उद्घाटन करते हुए कहा कि इससे बिहार में समृद्धि का एक नया अध्याय शुरू होगा। उन्होंने कहा कि यह पूरे क्षेत्र में व्यापार, कारोबार, रोजगार को बढ़ावा देगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पुल के बन जाने से मिथिला और कोसी आपस में एक हो गये हैं। लोगों का लगभग 86 वर्ष का सपना पूरा हो गया है। कोसी महासेलु के बन जाने से निर्मली और सरायगढ़ के बीच दूरी 298 से घट कर मात्र 22 किलोमीटर रह गयी है।  प्रधानमंत्री ने सहरसा-आसनपुर-कुपहा खंड पर सुपौल रेलवे स्टेशन से डेमू रेलगाड़ी भी रवाना की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लगभग तीन हजार करोड़ रुपये की लागत से पूरी हुई बारह रेल परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया। इनमें दो नई रेल लाइनें, पांच विद्युतीकरण परियोजनाएं, बरौनी में इलेक्टिंक लोकोमोटिव शेड और बाढ़ तथा बख्तियारपुर के बीच तीसरी लाइन परियोजना शामिल है। दो नई रेल लाइनें हैं – हाजीपुर-घोशवार-वैशाली खंड और इस्लामपुर-नटेशर खंड तथा बाढ़-बख्तियारपुर के बीच करनौती-बख्तियारपुर बाईपास रेल लाइन। रेलविद्युतीकरण परियोजनाओं में मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी खंड, कटिहार-न्यू जलपाईगुड़ी, समस्तीपुर-खगडिया, भागलपुर-शिवनारायणपुर और समस्तीपुर-जयनगर खंड शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाजीपुर-घोसवर-वैशाली नई रेल  लाइन  के शुरु  होने  से  वैशाली नगर, दिल्ली  और  पटना से भी सीधी रेल सेवा से जुड़ जाएगा। इस सेवा से वैशाली में पर्यटन को बहुत बल  मिलेगा  और  युवा  साथियों  को  नए  रोजगार  उपलब्ध होंगे।

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