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महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों को कल से मिलेगी ओवरड्राफ्ट सुविधा

नई दिल्ली : ग्रामीण विकास मंत्रालय के ग्रामीण विकास विभाग दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, डी.ए.वाई-एन.आर.एल.एम के अंतर्गत सत्यापित महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों को पांच हजार रुपये की ओवरड्राफ्ट की सुविधा मिलेगी।

18 दिसम्बर को होने वाले इस कार्यक्रम में “डिस्कोर्स ऑन रूरल फाइनेन्शियल इंक्लूजन” (ग्रामीण वित्तीय समावेश पर परिचर्चा) को भी शामिल किया गया है।  वर्ष 2020-21 के दौरान डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत बैंकों को उनके कामकाज के लिये वार्षिक पुरस्कारों की भी घोषणा की जायेगी।

सत्यापित स्वयं सहायता सदस्यों को पांच हजार रुपये की ओवरड्राफ्ट सुविधा की अनुमति दिये जाने के विषय में वित्तमंत्री ने  2019-20 के अपने बजट भाषण में जो घोषणा की थी। उसके अनुसार ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, डीएवाई-एनआरएलएम ने देश के ग्रामीण इलाकों में महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याओं को ओवरड्राफ्ट सुविधा प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे वे अपनी आकस्मिक और आपातकालीन जरूरतों को पूरा कर सकें। एक अनुमान के अनुसार डीएवाई-एनआरएलएम के तहत पांच करोड़ महिला स्वयं सहायता समूह सदस्य इस सुविधा की पात्र हो जायेंगी।

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने भी इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है और ग्रामीण इलाकों की महिला स्वयं सहायता समूह सदस्य इस सुविधा को लेने के लिये उन बैंकों की शाखाओं पर जायेंगी, जहां प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत उनके बचत खाते खोले गये हैं।

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, डीएवाई-एनआरएलएम ग्रामीण विकास मंत्रालय की प्रमुख योजना है। जिसका लक्ष्य है निर्धन महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों जैसे सामुदायिक संस्थानों के जरिये लामबंद करना। जिससे ग्रामीण निर्धनता दूर हो सके। दूसरा लक्ष्य – बैंकों से आवश्यक ऋण तक उनकी पहुंच बनाकर उनकी आजीविका के आधार को मजबूत बनाना। मिशन की शुरुआत जून 2011 में हुई थी और 15 दिसंबर, 2021 तक 73.5 लाख स्वसहायता समूहों में 8.04 करोड़ महिलाओं को जोड़ा गया है। आशा की जाती है कि 2024 तक लगभग 10 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ दिया जायेगा।

30 नवंबर, 2021 तक के इस वित्त वर्ष के दौरान, 27.38 लाख स्वयं सहायता समूहों को 62,848 करोड़ रुपये तक के ऋण बैंकों ने प्रदान किये हैं। अप्रैल 2013 के बाद से 4.45 लाख करोड़ रुपये से अधिक के ऋणों तक महिला स्वसहायता समूह सदस्याओं की पहुंच बनी, ताकि अन्य चीजों के साथ रचनात्मक उद्यमों में समुचित निवेश हो सके। बकाया राशि एक लाख 33,915 करोड़ से अधिक है, जिसमें फंसे हुये कर्ज सिर्फ 2.49 प्रतिशत हैं। मिशन, समुदाय आधारित पुनर्भुगतान प्रणाली (सीबीआरएम) का इस्तेमाल कर रहा है, जिसका प्रबंधन समुदाय करता है और जिसके तहत समिति में विभिन्न स्वसहायता समूहों या उनके संघों के प्रतिनिधि होते हैं। यह सभी स्वयं सहायता समूहों और बैंकों के बीच संपर्क की निगरानी की जिम्मेदारी निभाते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि नियमों तथा सामाजिक दबाव के जरिये स्वयं सहायता समूह बैंकों को शीघ्र धनराशि चुका दें।

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