शिक्षकों ने केदारनाथ पाण्डेय की जीत तय की है : आजाद

पटना : बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पाण्डेय के पक्ष में प्रचंड लहर है।

संघ के प्रमंडलीय सह संयोजक आलोक आजाद ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के कई जिलों का दौरा करने के बाद प्रेस वार्ता में यह बात कही। उन्होंने कहा की विधान पार्षद श्री पाण्डेय लगातार चौथी बार सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से रिकार्ड मतों से जीत रहे हैं।

श्री आजाद ने निर्वाचन क्षेत्र के सारण, सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिम चंपारण  जिले में दौरा किया। उन्होंने कहा कि सभी कोटि के शिक्षकों का समर्थन केदारनाथ पाण्डेय को मिल रहा है।

आलोक ने कहा कि शिक्षकों के मान-सम्मान के प्रतीक श्री पाण्डेय शिक्षा और शिक्षकों की समस्यायों को समझने तथा उसका निराकरण करने वाले सबसे योग्य और शिक्षाविद प्रत्याशी हैं। इनका जीवन शिक्षा और शिक्षकों के लिए ही समर्पित रहा है। श्री पाण्डेय ने शैक्षिक समस्याओं के निदान के लिए सदन से लेकर सड़क तक संघर्ष किया है।  शिक्षकों के वेतनमान ढांचे के निर्माण और सेवा शर्त नियमावली के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। श्री पाण्डेय आगे भी शिक्षकों‌ के लेवल 7 तथा लेवल 8 समेत पंचायती राज से अलग करने और वित्तरहित, अनुदानित शिक्षा नीति को समाप्त करने की लड़ाई लड़ेंगे। इस लिए इन्हें ही सदन में पुनः भेजना श्रेयश्कर है।

आलोक ने कहा की कुछ स्वघोषित प्रत्याशी शिक्षकों के हितैषी बने घुम रहे हैं। जो बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ और श्री पाण्डेय के बारे में अफवाह फैला रहे हैं, जबकी यह सभी लोग शिक्षक विरोधी संगठनों और दलों‌ के हैं। शिक्षक समाज उन सभी प्रत्याशीयों की जमानत जब्त करवाएगा।  जो वैसे दलों‌ और गठबंधन के समर्थन से मैदान में हैं। जिनके नेता कहते हैं कि भगवान भी आ जाएं तो वेतनमान नहीं देगें। शिक्षक समाज ने यह निर्णय लिया है कि जो शिक्षक हित की बात करेगा तथा बिहार के सभी शिक्षकों‌ को समान काम समान वेतन देने का घोषणा अपने संकल्प पत्र में लाया है और लाएगा, शिक्षक तथा उनका परिवार सभी का वोट उसी को मिलेगा।

उन्होंने अफवाहवाज तथा शिक्षकों‌ के मान सम्मान को शिक्षक विरोधी दलों‌ तथा उम्मीदवारों के हाथों बेचने वाले शिक्षकों के पालिटीकल पाकेटमार शिक्षक नेताओं से भी शिक्षकों को बचने की अपील की।

श्री आजाद के साथ दौरे में परवेज अनवर, मिथिलेश ठाकुर, कृष्णा कुमार, संतोष कुमार सहित अन्य शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्ष शामिल थे।

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