शिक्षण संस्थानों को ज्यादा स्वायत्तता मिले तभी शैक्षणिक विकास संभव

पटना। शिक्षाविद और शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के संस्थापक अतुल कोठारी ने कहा है कि शैक्षणिक संस्थानों को  ज्यादा से ज्यादा स्वायत्तता दी जानी चाहिए तभी देश का शैक्षणिक विकास होगा।   श्री कोठारी पटना विश्वविद्यालय के यूजीसी ह्यूमन रिसोर्सेज डेवलपमेंट सेंटर ऑनलाइन की ओर से आयोजित प्रथम फैकल्टी इंडकसन प्रोग्राम में ऑनलाइन व्याख्यानमाला जिसका विषय था “भारत में शैक्षिक परिवर्तन: आवश्यकता और दिशा” पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा की प्रारंभिक शिक्षा को कम महत्व मिल रहा है। जिसका नतीजा है कि समेकित शैक्षणिक योजना के अभाव में डिग्री आधारित शिक्षा का विकास हुआ और शिक्षा के मूल उद्देश्य पीछे छूट गए।  श्री कोठारी ने कहा कि नई व्यवस्था का जोर हमारी मातृभाषा में शिक्षण पर है ।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान केवल देश के लिए ही नहीं, पूरे विश्व के लिए जरूरी है। उन्होंने शिक्षा की स्वायत्तता की जरूरत को भी समझाया। स्वायत्तता केवल सरकार के स्तर पर और स्वपोषित शैक्षणिक संस्थान के स्तर से इतर माँ बाप की ओर से अपने बच्चों को विषय चुनने में दें।  उन्होंने शिक्षा के माध्यम से चरित्र निर्माण की बात करते हुए  भारतीय ज्ञान- परंपरा की प्रासंगिकता को समझाया। शिक्षक कर्तव्य बोध , समग्र पाठ्यक्रम की पुनर्रचना का प्रारूप,  शिक्षा के वैश्विक संदर्भ पर भी चर्चा की।

कार्यक्रम के दूसरे सत्र को संबोधित करते हुए पद्मश्री प्रो. एच सी वर्मा ने शिक्षक से समाज की अपेक्षाओ पर प्रकाश डालते हुए शिक्षण कला को समझाया। वर्तमान दौर में आन लाइन शिक्षा के विभिन्न आयाम और उपयोगिता को बताते हुए तकनीक को अपनाने के फायदे बताए।

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