सरकार शिक्षकों को अविलम्ब बकाये वेतन का भुगतान करे : आलोक आजाद

पटना : बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने नियोजित शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के कार्यरत अवधि के वेतन भुगतान की मांग की है। संघ के प्रमंडलीय सह संयोजक आलोक आजाद ने बिहार के वैशाली जिले के मुख्यालय शहर हाजीपुर में अपने शिक्षक सदस्यों से मोबाइल पर वार्ता करने के बाद कही है। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक समाज हित में कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए प्रदेश सरकार के साथ हैं। सह संयोजक ने भारत के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस संबंध में एक पत्र भेजा है। उन्होंने मानवता के आधार पर इसे तत्काल पूरा करने की मांग की है।  श्री आजाद ने कहा कि बिहार के सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक तथा पुस्तकालयाध्यक्ष अपनी मांग सातवें वेतन आयोग के अनुशंसित वेतनमान के लेवल-7 और लेवल-8 जो क्रमशः 44,900 तथा 47,600 है को लागू करने की मांग करते हैं। साथ ही सेवा शर्त, ऐच्छिक स्थानान्तरण, सेवा की निरन्तरता, भविष्य निधि, पेंशनादि, अवकाश और ई.पी.एफ की सुविधा के साथ माध्यमिक तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों को पंचायती राज से अलग करने की भी मांग करते हैं। श्री आजाद ने कहा कि अपने जायज मांगों को लेकर  बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के नेतृत्व में 25 फरवरी से शिक्षक शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

उन्होंने कहा कि हड़ताली शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के कार्यरत अवधि का वेतन जिला कोषागार में आवंटन की उपलब्धता के बावजूद भी विभागीय आदेश के कारण रोक दिया गया है। उनके बकाये का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है, जिससे वेतन से वंचित सभी शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों को कोरोना महामारी जैसी संकट की घड़ी में उनके दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भयावह आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसका खामियाजा नियोजित शिक्षकों के परिवार और बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जबकि सभी संगठनों को अपनी मांगों के लिए विधिवत सूचना देकर संघर्ष करने का संवैधानिक अधिकार है।

सह संयोजक ने कहा कि मुख्यमंत्री जी हम शिक्षक और पुस्तकालयाध्यक्ष भी इस देश और राज्य के नागरिक हैं। एक तरफ जहां सरकार सभी देशवासियों को तथा सरकार के की ओर से विभिन्न विभागों के पेंशनधारियों को तीन महीने का अग्रिम पेंशन दिया जा रहा है, विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि के अग्रिम भुगतान का निर्णय व स्वास्थ्य सेवा जुड़े लोगों को प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय अत्यंत प्रशंसनीय है। दूसरी ओर प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों, पुस्तकालयाध्यक्षों और कर्मचारियों को कार्यरत अवधि का वेतन भुगतान न करना प्राकृतिक न्याय के खिलाफ है। सरकार ने निजी क्षेत्र के सभी कर्मियों को कार्यालय ना आने पर भी बिना वेतन कटौती के ही वेतन भुगतान  का आदेश दिया गया है। अन्य प्रकार से भी आम नागरिकों को सुरक्षित करने तथा निशुल्क या अनुदानित दर पर खाद्यान्न, अग्रिम जीवनयापन भत्ता, रुपया सहित सभी तरह की सुविधाएं मुहैया करा रही है वहीं शिक्षकों के कार्यरत अवधि का वेतन रोक कर उन्हें भुखमरी के कगार पर पहुंचा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकी इस महामारी में सभी नियोजित हड़ताली शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्ष भी बढ़ चढ़कर अपनी भूमिका बिना वेतन के अपने व्यक्तिगत खर्चों से अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए समाज में जागरूकता तथा मास्क एवं सैनेटाइजर बांट कर सरकार का सहयोग भी कर रहे हैं तथा देशवासियों की सेवा में संलग्न हैं।

श्री आजाद ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार के अड़ियल रवैया के कारण कई प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक हड़ताल के अवधि में पैसों के आभाव में मर गये हैं। सरकार यदि अभी भी अपने हटपूर्ण रवैया का त्याग नहीं करती है तो शिक्षक और उनके परिवार के सदस्य महामारी से मरे या नहीं मरें परंतु इस लाकडाउन में पैसों के अभाव में भूख से जरुर मर जाएंगे जिसकी सारी जवाबदेही सरकार की होगी।

उन्होंने बिहार सरकार के सुचना एवं जनसंपर्क मंत्री निरज कुमार के बयान शिक्षक सरकार की जमा पुंजी है तथा मुख्यमंत्री महामारी से निपटने के बाद शिक्षकों के मांग पर विचार करेंगे का स्वागत किया तथा मुख्यमंत्री से अड़ियल रवैए का त्याग कर महामारी को देखते हुए कार्यरत अवधि का वेतन भुगतान जल्द से जल्द करने तथा नियोजित शिक्षकों तथा पुस्तकालयाध्यक्षों की मांग को मानते हुए बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के साथ बातचीत कर हड़ताल को छात्र हित,राज्य हित तथा शिक्षक एवं पुस्तकालयाध्यक्षों के हित में अविलंब खत्म करने की मांग की।

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