हर घर में होगा ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर, आसानी से मिलेगा ऑक्सीजन

नई दिल्ली : केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआरसीएमईआरआई) ने ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर प्रौद्योगिकी और हाई फ्लो रेट आयरन रिमूवल संयंत्र प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण किया है। ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर प्रौद्योगिकी को राजस्थान के कोटा स्थित मेसर्स सी एंड आई कैलिब्रेशंस प्रा.लि., और हरियाणा के गुरूग्राम में स्थित मेसर्स एसए कॉर्प, आईएमटी मानेसर को हस्तांतरित की गई है। साथ ही पानी से लौह तत्त्वों को दूर करने के लिये आसाम के गुवाहाटी स्थित हाई फ्लो रेट आयरन रिमूवल संयंत्र प्रौद्योगिकी मेसर्स मां दुर्ग सेल्स एजेंसी को दी गई है।

निजी क्षेत्र में इन प्रौद्योगिकी के आने से देश के हर घर में ऑक्सीजन मशीन पहुंच सकेगी साथ ही पानी से अधिक आयरन हटा देने से कई प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलेगी।

सीएसआईआर-सीएमईआरआई के निदेशक प्रो. (डॉ.) हरीश हिरानी ने कहा कि उनका संस्थान एमएसएमई की मदद करना चाहता है, जिससे वे जन-जन तक पहुंचने वाले उत्पाद बना सकें। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-सीएमईआरआई का मूलमंत्र है सबकी मदद करना, जिससे नवाचारों को आम लोगों तक पहुंचाया जा सके। इस काम के लिये ऐसे एमएसएमई का सहयोग जरूरी है, जिनके पास सस्ते निर्माण की क्षमता मौजूद हो।

पानी से आयरन हटाने वाली कम्पनी मेसर्स मा दुर्गा सेल्स एजेंसी  के ओमकार बंसल ने बताया कि असम में कई क्षेत्रों में पीने के पानी में लौह तत्त्व बडी मात्रा में मौजूद हैं, जिनके कारण पानी दूषित होने की समस्या पैदा हो गयी है। श्री बंसल ने कहा कि उनकी कंपनी चार सबसे ज्यादा समस्याग्रस्त जिलों में पानी को शुद्ध करने की तैयारी कर रही है। ये जिले हैं कामरूप मेट्रो, कामरूप अर्बन, बारपेटा और शिवसागर। उन्होंने कहा कि इस समय उनकी कंपनी 700 जल शुद्धिकरण प्रणाली लगाने की दिशा में काम कर रही है। ये छोटे संयंत्र होंगे और इनकी क्षमता 1000 लीटर प्रति घंटा होगी, यानी एक घंटे में इन संयंत्रों से 1000 लीटर पानी साफ होगा। कंपनी की योजना है कि हाई फ्लो रेट  6000 से 12000 लीटर प्रति घंटा आयरन फिल्टर प्रौद्योगिकी को असम के विभिन्न जिलों में शुरू किया जाये। यह प्रौद्योगिकी सीएसआईआर-सीएमईआरआई की है और इसे स्वीकृत सरकारी परियोजनाओं के अंग के रूप में चलाया जायेगा। इसमें सम्बंधित पंचायतों और भारत सरकार के जल जीवन मिशन की भी भागीदारी होगी।

राजस्थान के सी एंड आई कैलिब्रेशंस प्रा.लि. के अशोक पटनी ने केन्द्र सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन लोगों ने ऑक्सीजन उत्पादन की छोटे स्तर पर प्रौद्योगिकी प्रदान की है। ऑक्सीजन कंसेन्ट्रेटर के उत्पादन के लिये प्रोत्साहित किया। श्री पटनी ने कहा कि उनके पास इसके उत्पादन का पर्याप्त बुनियादी ढांचा है साथ ही एनएबीएल की ओर से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालायें भी मौजूद हैं। वे लोग अभी 700 से अधिक उपकरणों की जांच कर रहे हैं। मौजूदा महामारी के मद्देनजर, कम्पनी चाहती है कि इस उत्पादन को बढ़ाकर समाज की मदद की जाये, जिससे लोगों को राहत मिल सके। उन्हें अस्पतालों का रुख न करना पड़े। उन्होंने बताया कि इस समय उनका सारा फोकस पांच लीटर क्षमता वाले कंसेन्ट्रेटर के निर्माण पर है और वे उसे देश के कोने-कोने तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। मौजूदा वक्त में उनकी कंपनी हर महीने 3000 से 4000 कंसेन्ट्रेटर यूनिटों का निर्माण कर रही है। कच्चा माल हासिल करने में कई अड़चने जरूर हैं और लागत का मसला भी है, लेकिन वे आयात के जरिये इस अड़चन को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।

गुरुग्राम के मानेसर स्थित एसए कॉर्प, आईएमटी के दीपक जैन ने बताया कि उनकी कंपनी प्रोटोटाइप के विकास पर काम कर रही है। उनका लक्ष्य है कि हर महीने पांच हजार यूनिटों का निर्माण किया जाये, जिसे जल्द से जल्द बढ़ाया जायेगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रोटोटाइप के विकास की वर्तमान लागत लगभग 40,000 से 45,000 तक आती है, क्योंकि कच्चे माल की कीमत में हाल में बहुत तेजी आ गई है। श्री जैन ने कहा कि उम्मीद की जाती है कि बड़े पैमाने पर निर्माण करने से लागत कम होगी। इसके बारे में भी उन्होंने संस्थान से निवेदन किया है।

 

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